Friday, January 2, 2009

क्या हैं मेरी खता

तू हैं मेरे हर ख्वाबों में
क्या ये हैं मेरी खता
तू हैं मेरे हर साँसों में
क्या ये हैं मेरी खता
तू हैं मेरी खामोशी में
क्या ये हैं मेरी खता
तोड़ी थी रस्में सारी मैंने तेरे लिए
क्या ये हैं मेरी खता
लगा ना सका मैं पहरे तेरी यादों पे
क्या ये हैं मेरी खता
झुकते हैं सर खुदा के सामने तेरे वास्ते
क्या ये हैं मेरी खता
बैठे -बैठे खो जाता हूँ उन लम्हों में
जो तेरे साथ मैंने गुजारी थी
कहीं ये तो नहीं हैं मेरी खता
अक्सर बातें करता हूँ ख़ुद से तेरे बारे में
दुनिया को भुलाकर
कही ये तो नहीं हैं मेरी खता
पूछ रहा हूँ खता मैं अपनी तुमसे
क्या ये हैं मेरी खता

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