उन हवाओं की थपेरों की बात क्या ,
जो पल भर छूके गुजर जाती है .
उन तारों की टिमटिमाहट क्या ,
जिनके आंसू सुबह शबनम बन जाती है .
इंतजार नहीं मुझे तेरे लौट के आने का ,
क्या करे काफिर दिल दगा दे जाती हैं .
खुशियों की चाहत नहीं हैं मुझे ,
अब तो दर्द-ए-दिल रास आती हैं .
जो पल भर छूके गुजर जाती है .
उन तारों की टिमटिमाहट क्या ,
जिनके आंसू सुबह शबनम बन जाती है .
इंतजार नहीं मुझे तेरे लौट के आने का ,
क्या करे काफिर दिल दगा दे जाती हैं .
खुशियों की चाहत नहीं हैं मुझे ,
अब तो दर्द-ए-दिल रास आती हैं .
7 comments:
very nice poem. keep it up.
thanks,
दिल मुझे तितली का टूटा हुआ पंख लगता है।
अब तेरा नाम भी लिखते हुए डर लगता है।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
bahut khoobsurat. ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
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आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
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अमित के. सागर
बिंदास हो कर इतनी उदासी क्यों! स्वागत ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.
इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका हिन्दी चिटठा जगत में स्वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को मजबूत बनाएंगे। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
na dard hoga na tanhayi hogi,
na ashk honge na bewafaai hogi, kab ayega wo din?
na dil tutenge na koi gum hoga,
na koi royega na kisi ki ruswayi hogi,
kab ayega wo din?
mere maula, mere malik,
tera inaayat hogi, tera karam hoga,
kab ayega wo din?
chalo thik hai. narayan narayan
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