
राज सुमन से बोला - देखो ना मैं दिल्ली जा रहा हूँ ।
टोकरी ढोने जा रहे हो क्या , सुमन तपाक से बोली अरे टोकरी ढोने नहीं पढ़्ने जा रहा हूँ ,राज बोला ।
अरे ये तो अच्छी बात है ,जाओ और मन लगाकर पढ़ना बिना सोचे तो सुमन बोल गई लेकिन उसके दिमाग में जुदाई का ख्याल आते ही उसका दिल दर्द के चादर से ढ्क गया । सुमन सोच रही थी , पता नहीं राज दिल्ली से कब आयेगा । उसका दिल दर्द से फटा जा रहा था लेकिन उसने अपने चेहरे पर शिकन तक नहीं आने दी ।
सुमन क्या अपनी एक तस्वीर दे सकती हो , राज पूछा . सुमन आंखें तरेरकर कर बोली क्या करोगे मेरी तस्वीर लेकर पूजा करूँगा तेरी तस्वीर की , राज बोला ।
तब नहीं मिलेगी तस्वीर , सुमन बोली ।
सच बोलू मुझे जब तेरी याद आयेगी तो तेरी तस्वीर देख लिया करूँगा , राज बोला ।
राज और भी क्या क्या बोलता रहा , लेकिन सुमन तो जैसे सुन ही नहीं रही थी , उसके दिमाग में विचारों की आंधी चल रही थी । वो सोच रही थी राज क्यों नहीं कहता की मैं तेरी तस्वीर में तुझे ढुनढुगा , मैं अपने प्यार को एक मिनट भी अपनी आँखों से ओझल नहीं होने देना चाहता हूँ । क्यूँ नहीं कह देता की टूटकर चाहता हूँ तुझे , मैं बेपनाह मोहब्बत करता हूँ तुमसे .
इधर राज ना जाने क्या क्या कहकर चुप हुआ तो देखा सुमन बिना आवाज़ के बुदबुदा रही है . राज पूछा , क्या मन ही मन मुझे गाली दे रही हो क्या ?
आआआ सुमन सोते से जागी और बोली अरे नहीं रे !! मैं तुम्हे गाली क्यूँ दूंगी और प्यार से एक चपत गाल पे दे मारी , हाँ तो तुम तस्वीर मांग रहे थे ना मेरी , रुको देती हूँ और उसने अपनी एक तस्वीर एल्बम से निकाल कर दे दी ।
राज तस्वीर लेकर अपने घर चला आया ।
उधर सुमन के मस्तिषक में विचारों की आंधी चल रही थी तो इधर राज के दिमाग में भी विचारों की लहरे के झोके हिलोड़े मार रही थी । अतीत की बाते चलचित्र की भाँति परत दर परत चल रही थी । राज और सुमन के घर ईक ही गाँव में था अगल - बगल । वे दोनों एक ही विद्यालय में पड़ते थे । उनके घरवाले के संबध भी काफी अच्छी थे । सुमन राज से 2 क्लास पीछे थी । इसलिए कुछ पूछने सुमन राज के घर आ जाती थी या राज को अपने घर बुला लेती थी । समय का चक्र तो चलता रहता है तो भला इनलोगों के लिए कैसे रुकता ? दोनों के शरीर में बदलाव हो रहे थे। उधर सुमन कली से फूल बन चुकी थी सुंदर सी , तो इधर राज भी अच्छा दीखता था। दोनों अकेले में बैठ कर घंटो इधर उधर की बात किया करते। लेकिन प्यार का इजहार कभी नहीं करते। दोने के अपने हाल - ये - दिल ना बयां करने की अपनी अपनी मजबूरी थी। लड़की थोड़े ही पहले प्यार का इजहार करती हैं सुमन सोचती। इधर राज सोचता था जब अपने पैरों पर खड़ा हो जाऊंगा तो उसके पापा से उसका हाथ मांग लूँगा ।
कल सुबह राज को दिल्ली जाना था अपने ग्रेजुएशन की पढाई करने के लिए। इसिलए अपना सामान बैग में रखने लगा जिससे उसकी को जरुरी सामान ना छूट जाए , फिर सोने चले गया । लेकिन नींद आए तब ना। राज के दिल में तो बेचैनी का आलम था तो नींद कैसे आती । काफी देर बाद नींद रानी राज पे तरस खाकर उसके आँखों में डेरा डाल ली।
राज सुबह तैयार हुआ । लेट तो पहले ही हो चुकी था। फिर भी दिल्ली जाने से पहले वह सुमन से मिल लेना चाहता था । जब राज सुमन के कमरे के पास गया तो दरवाजा बंद पाया । उसे अचरज हुआ कि सुबह 4 बजे जगने वाली लड़की आज 8 बजे तक कैसे सो रही है !! जैसे ही राज सुमन को आवाज़ देना चाहा तो उसके मुँह खुले के खुले रह गए , लेकिन आवाज़ नहीं निकली मुँह से । उसकी सिसकियों के आती आवाज़ राज को बेचैन कर दिया । उसने पहली बार सुमन को हँसने के बजाये रोते सुनी थी । उसे ऐसा लगा की उसके कदम लड़खड़ा जायेंगे।वह बिना मिले ही उससे चला गया ।
राज जब अपने घर आया तो पाया की रिक्शावाला उसका इंतजार कर रहा है ।उसने रिक्शा पे सामान रखा और माँ - पापा के पैर छुए तो माँ पूछी सुमन से मिल लिए क्या बेटा ?
राज बोला , हाँ। रिक्शा आगे बढी राज पीछे मुड़कर देखा तो पाया सुमन खिड़की से उसे ही देख रही है और उसके आंखों से मोती लुढक कर गाल तक आ रहे थे । राज अपना चेहरा घुमा लिया । लेकिन कब तक अपनी दिल को रोक के रखता अन्तिम मोड़ पे जाके फिर मुड़ा तो सुमन उसे ही एकटक देख रही थी आंसुओं से भरे आँखों से । उसका दिल किया कि लौट जाऊ सुमन के पास लेकिन दिल जो चाहे वो हो जाए तो फ़िर सोचना ही क्या ?
राज स्टेशन पर जब पहुँचा तो ट्रेन 1 घंटा लेट थी । " दिल जिस बातो को सामने रहकर नहीं कह पाती उसे दूर रह के कलम कागज़ कह देते है ।"
सुमन मैं ये पहला ख़त तेरे पास लिख रहा हूँ । माफ कहना मैं आज तुमसे बिना मिले ही चला आया। मैं मिलने तो गया था लेकिन तुम्हारे सिसकी ने मेरे मुह पे ताला और कदमों पे जंजीर बाँध दी। जबान धोखा दे गया और हिम्मत टूट गई । मैं तुमसे कुछ कह नहीं पाया। मैं पढाई खत्म होते ही लौट आऊंगा।
तेरा दोस्त राज
दिल्ली आने के बाद एक पल भी राज का मन नहीं लगता था। हर समय सुमन का रोता चेहरा दीखता। लगता था सुमन की ऑंखें पुकार रही हो "आ जाओ लौट कर तेरी याद मुझे हर पल सता रही है चाहे जहाँ भी जाऊ तेरी कमी मुझे रुला रही है " राज हरदम यही अपने आप से कहा करता मैंने तो सुना था की "दिल्ली दिलवालों का हैं , यहाँ की रंगीनियों में हर किसी का मन लग जाता है "। लेकिन मेरा यहाँ मन क्यूँ नहीं लगता। फिर भी पढाई के साथ साथ पर्तियोगी परीक्षाये देते रहे उसने। और ग्रेजुएसन की परीक्षा खत्म होते ही उसके CDS के रिजल्ट भी आ गए थे । उसे 2 महीने के बाद ट्रेनिंग के लिए देहरादून जाना था । उसकी खुशी दुगुनी हो चुकी थी । अब वो घर जा सकता था।
घर आया तो देखा सुमन के घर में काफी चहल पहल हैं। एक बार उसका दिल आशंका से भर गया।
सुमन के पिताजी रास्तें में मिल गए , बधाई हो बड़ी खुशी हुई जानकर की तुम ट्रेनिंग के लिए देहरादून जा रहे हो , वे बोले बेटा एकदम सही समय पे आ गए हो । मेरे बुढे कंधे अब काम से हलके हो जायेंगे । अब शादी की सारी तैयारी तुम्ही देखो ।
राज ने डरते डरते पूछा किसकी शादी हो रही है ।अरे सुमन की शादी हो रही है ।
जिसका डर था आखिरकार वही हुआ .
राज ने दर्द भरे आवाज़ में पूछा, सुमन कहा है , तो वे बोले तेरे ही घर गयी होगी। शादी तय होने के बाद से ना तो उसे खाना की चिंता रहती हैं ना सोने की। पता नहीं क्यों खोयी रहती हैं आजकल ।1 महीना में सूख कर कांटा हो गई है , जरा तुम ही समझाना उसे बेटा। और भी ना जाने वे क्या क्या बोलते रहे और राज के दिल का हाल जाने बगैर उसके दिल को छलनी करते रहे । राज चुपचाप सुनता रहा ।
फिर अपने घर आया और माँ को प्रणाम किया और सीधे अपने कमरा में गया . वहाँ सुमन तो नहीं थी लेकिन उसके सभी सामान वैसे ही थे जैसे वह छोड़ के गया था लेकिन कमरा पहले से ज्यादा साफ सुथरा था। जैसे कमरा की हर एक चीज वहाँ उसके होने की अहसास दिला रही हो ।
फिर आकर माँ से पूछा सुमन कहाँ गयी ।
माँ बोली अभी तो तेरे कमरा में ही थी पता नहीं कहाँ गयी। लाख रोकती रही की राज अभी आने वाला है , मिल के जाना लेकिन बोलने लगी की मुझे जरुरी काम याद आ गया है मैं आकर मिल लूंगी राज से। आखिरकार क्या करती बेचारी , वो तुमसे प्यार करती है ना । तुम्हारे जाने के बाद दिन भर तेरे कमरा में पड़ी रहती थी । तुम्हारे कमरे की साफ - सफाई करती रहती थी . पागलों की तरह तेरे किताबों को चूमती रहती । एक दिन मैंने देख लिया और पूछा तो बोली , चाची मै राज से प्यार करती हूँ . मैं शादी भी उन्ही से करूंगी। आप मेरी मम्मी से मेरा हाथ मांग लीजये ना । तो आप क्या बोली उससे , राज बेचैन होकर पूछा ? राज की माँ बोली भला मै क्या बोलती । मैं बोली की बेटी एक ही गावं में रहकर तुम दोनों की शादी सम्भव है क्या । समाज हमलोगों का जीना दुश्वार कर देगा। फिर कहने लगी की अगर मेरी राज से शादी नही हुई तो मैं जहर खा लूँगी । कितना समझाईं तो आखिरकार मानी ,लेकिन ख़ुद को जिन्दा लाश बना रखा हैं ।
राज जिंदगी में पहली बार अपनी माँ से गुस्से में बोला, मुझे नहीं पता आपने सही किया है या ग़लत लेकिन एक बार तो मुझसे भी पूछनी चाहिए थी ना की मेरे दिल में क्या हैं। बस मुझे इतना पता है भूखे रहने पर आपकी समाजआपको 2 जुन रोटी नही देगी खाने के किए । लेकिन समाज दो मासूम जिंदगियों की बलि जरुर चढा दी । और इसके जिम्मेवार आप भी हैं थोड़ी या बहुत ।
राज सिसकते हुए अपने कमरे में चला गया और सुमन का इंतजार कराने लगा। राज बार बार सोच रहा था पता नही मुझे किस गलती की सजा दे रही है । कम से कम मुझसे पूछ लेनी चाहिए थी कि मेरे दिल में क्या है । पता नही उसके आँखें कब बंद हो गए । सुमन अगर आने के लिए गयी रहती तब ना आती ।
रात होने पर माँ ने जगाई और खाना खाने को बोली। " जब दिल टूट जाता हैं तो मानव का किसी कम में मन नही लगता हैं "। खाना खाने कि बात तो दूर उसे पूरी दुनिया वीरान लग रही थी । माँ राज को समझाने लगी , बेटा जो हुआ उसे भूल जाओ । " प्रेम केवल पाने का मतलब ही नही होता । प्रेम त्याग भी करना जानता है । बस समझ लो तुम्हारा प्रेम सफर तो बना कुछ दिनों के लिए लेकिन मंजिल ना बन सका " । मैंने तेरे दिल का हाल जाने बगैर बहुत बड़ी गलती कर दी तेरे साथ । ये तेरी बदनसीब माँ कुछ नही कर सकी तेरे लिए । और राज ने माँ के सीने पे सर रख दिया ।
आँसूओं के रेला उसके आंखों से बह निकले। " बेबसी के आँसूं कभी कभी इंसान के साथ बड़ा उपकार करती है ,आँख के आँसू ह्रदय के आँसू को बहा ले जाती है " ।
जब राज चुप हुआ तो माँ रोते हुए कहने लगी ,सुमन के पिताजी तुझे बुलाने आए थे । जा शादी की तैयारी में उनके हाथ बटा दे समझाना दोस्त के शादी में मदद कर रहे हो , निस्वार्थ मदद ।
आँसू के बहने से दिल को सुकून तो मिला ही था और माँ की बातें राज पे जादू सा असर किया।
राज उसकी शादी के तैयारी में ख़ुद का दर्द भुला दिया । धीरे धीरे वह दिन भी आया जिसे सभी को बेसब्री से इंतजार था । सभी खुश थे सिवाय राज और सुमन के ।
उस दिन पता नही राज के शरीर में इतनी फुर्ती कहाँ से आ गयी थी । वो मशीन कि तरह भाग भाग कर काम देख रहा था कि पार्टी में कोई त्रुटी न रह जाए। चारों तरफ़ रंगीन बल्बों की सजावट थी । राज को लग रहा था ये बल्ब उसके टूटे दिल पे कहकहे लगा रहे है झिलमिलाते हुए । उन बल्बों की रोशनी से पूरी पार्टी जगमगा रही थी । केवल राज और सुमन के दिल में अन्धकार था । लेकिन इन बातो से तो उसे कोई सरोकार ही नही था आज , आज तो अपने दिल को हाड़ मांस के बजाय पत्थर का बना लिया था । सुमन न कभी राज के सामने आती थी और राज भी उसके सामने जाने से हिचकिचाता था। उन्हें डर था कि कही फ़िर से कमजोर न हो जाए वे दोनों ।
राज सभी मेहमानों को खाना खिलवाने के बाद थोडा आराम करने के लिए कुर्सी पे बैठ गया। बहुत दिन से ठीक से नही सोने और आज की थकान की वजह से उसे न जाने कब नींद आ गयी।
सुबह होने से पहले रोने की आवाज़ सुनकर उसकी नींद खुली। उसने देखा सुमन की विदाई हो रही है। कुछ देर में सुमन के विदाई सम्पन्न होने वाली थी । राज सुमन के पास गया उसका दिया हुआ तस्वीर उसे लौटा दिया और बोला अब ये तेरी और केवल तेरी अमानत है, इसपर अब मेरा कोई अधिकार नही ।
सुमन तुंरत गाडी से उतरी और राज का पैर छूकर रोते हुए बोली, राज मुझे माफ कर देना मै तुम्हे दर्द और तन्हाई के सिवा कुछ देके तो नही जा रही लेकिन हाँ तुम्हारी यादें और तुम्हारे साथ बिताये हुए एक एक पल अपने दिल में संजोयें जा रही हूँ और ये तस्वीर तो है भी नहीं की मै तुम्हारी तरह लौटा दूँ , ऐसे भी मै लौटाना नहीं चाहती उसपे मेरा और केवल मेरा अधिकार हैं और तुम उसे मुझसे छीन भी नही सकते । हो सके तो मुझे इस गलती के लिए माफ कर देना ।
राज सुमन के ओठों पे अंगुली रख के बोला ऐसे नही बोलते । तुम अपनी यादें मेरे पास छोड़ के जा रही हो और मेरे सात जन्मो के लिए काफी है । तुम सदैव सुखी रहो बस यही मेरी दुआ है । फिर सुमन को राज गाड़ी में बैठाया और गाड़ी चल पडी ।
पूरी तरह अभी सुबह के उजाले फैले नही थे । राज छत पे चढ़ गया और तब तक सुमन को जाते देखता रहा जब तक गाड़ी के बल्ब की रोशनी दिखनी बंद नही हो गई । अब तक उसके रोके हुए आंसूओं के सैलाब उमड़ पड़ा जो शायद इसी समय का इंतजार कर रहा हो बाहर आने के लिए । राज को लगा की ये चांदनी रात अपनी समाप्ति पे नही मगर मेरे वीरान हुए दिल पे रो रही है . तभी कोयल की कुक अपने होने का अहसास दिलाई जैसे कह रही हो , मै भी तुम्हारे दुःख में शरीक हुँ ," टूटे दिलवाले "।
टोकरी ढोने जा रहे हो क्या , सुमन तपाक से बोली अरे टोकरी ढोने नहीं पढ़्ने जा रहा हूँ ,राज बोला ।
अरे ये तो अच्छी बात है ,जाओ और मन लगाकर पढ़ना बिना सोचे तो सुमन बोल गई लेकिन उसके दिमाग में जुदाई का ख्याल आते ही उसका दिल दर्द के चादर से ढ्क गया । सुमन सोच रही थी , पता नहीं राज दिल्ली से कब आयेगा । उसका दिल दर्द से फटा जा रहा था लेकिन उसने अपने चेहरे पर शिकन तक नहीं आने दी ।
सुमन क्या अपनी एक तस्वीर दे सकती हो , राज पूछा . सुमन आंखें तरेरकर कर बोली क्या करोगे मेरी तस्वीर लेकर पूजा करूँगा तेरी तस्वीर की , राज बोला ।
तब नहीं मिलेगी तस्वीर , सुमन बोली ।
सच बोलू मुझे जब तेरी याद आयेगी तो तेरी तस्वीर देख लिया करूँगा , राज बोला ।
राज और भी क्या क्या बोलता रहा , लेकिन सुमन तो जैसे सुन ही नहीं रही थी , उसके दिमाग में विचारों की आंधी चल रही थी । वो सोच रही थी राज क्यों नहीं कहता की मैं तेरी तस्वीर में तुझे ढुनढुगा , मैं अपने प्यार को एक मिनट भी अपनी आँखों से ओझल नहीं होने देना चाहता हूँ । क्यूँ नहीं कह देता की टूटकर चाहता हूँ तुझे , मैं बेपनाह मोहब्बत करता हूँ तुमसे .
इधर राज ना जाने क्या क्या कहकर चुप हुआ तो देखा सुमन बिना आवाज़ के बुदबुदा रही है . राज पूछा , क्या मन ही मन मुझे गाली दे रही हो क्या ?
आआआ सुमन सोते से जागी और बोली अरे नहीं रे !! मैं तुम्हे गाली क्यूँ दूंगी और प्यार से एक चपत गाल पे दे मारी , हाँ तो तुम तस्वीर मांग रहे थे ना मेरी , रुको देती हूँ और उसने अपनी एक तस्वीर एल्बम से निकाल कर दे दी ।
राज तस्वीर लेकर अपने घर चला आया ।
उधर सुमन के मस्तिषक में विचारों की आंधी चल रही थी तो इधर राज के दिमाग में भी विचारों की लहरे के झोके हिलोड़े मार रही थी । अतीत की बाते चलचित्र की भाँति परत दर परत चल रही थी । राज और सुमन के घर ईक ही गाँव में था अगल - बगल । वे दोनों एक ही विद्यालय में पड़ते थे । उनके घरवाले के संबध भी काफी अच्छी थे । सुमन राज से 2 क्लास पीछे थी । इसलिए कुछ पूछने सुमन राज के घर आ जाती थी या राज को अपने घर बुला लेती थी । समय का चक्र तो चलता रहता है तो भला इनलोगों के लिए कैसे रुकता ? दोनों के शरीर में बदलाव हो रहे थे। उधर सुमन कली से फूल बन चुकी थी सुंदर सी , तो इधर राज भी अच्छा दीखता था। दोनों अकेले में बैठ कर घंटो इधर उधर की बात किया करते। लेकिन प्यार का इजहार कभी नहीं करते। दोने के अपने हाल - ये - दिल ना बयां करने की अपनी अपनी मजबूरी थी। लड़की थोड़े ही पहले प्यार का इजहार करती हैं सुमन सोचती। इधर राज सोचता था जब अपने पैरों पर खड़ा हो जाऊंगा तो उसके पापा से उसका हाथ मांग लूँगा ।
कल सुबह राज को दिल्ली जाना था अपने ग्रेजुएशन की पढाई करने के लिए। इसिलए अपना सामान बैग में रखने लगा जिससे उसकी को जरुरी सामान ना छूट जाए , फिर सोने चले गया । लेकिन नींद आए तब ना। राज के दिल में तो बेचैनी का आलम था तो नींद कैसे आती । काफी देर बाद नींद रानी राज पे तरस खाकर उसके आँखों में डेरा डाल ली।
राज सुबह तैयार हुआ । लेट तो पहले ही हो चुकी था। फिर भी दिल्ली जाने से पहले वह सुमन से मिल लेना चाहता था । जब राज सुमन के कमरे के पास गया तो दरवाजा बंद पाया । उसे अचरज हुआ कि सुबह 4 बजे जगने वाली लड़की आज 8 बजे तक कैसे सो रही है !! जैसे ही राज सुमन को आवाज़ देना चाहा तो उसके मुँह खुले के खुले रह गए , लेकिन आवाज़ नहीं निकली मुँह से । उसकी सिसकियों के आती आवाज़ राज को बेचैन कर दिया । उसने पहली बार सुमन को हँसने के बजाये रोते सुनी थी । उसे ऐसा लगा की उसके कदम लड़खड़ा जायेंगे।वह बिना मिले ही उससे चला गया ।
राज जब अपने घर आया तो पाया की रिक्शावाला उसका इंतजार कर रहा है ।उसने रिक्शा पे सामान रखा और माँ - पापा के पैर छुए तो माँ पूछी सुमन से मिल लिए क्या बेटा ?
राज बोला , हाँ। रिक्शा आगे बढी राज पीछे मुड़कर देखा तो पाया सुमन खिड़की से उसे ही देख रही है और उसके आंखों से मोती लुढक कर गाल तक आ रहे थे । राज अपना चेहरा घुमा लिया । लेकिन कब तक अपनी दिल को रोक के रखता अन्तिम मोड़ पे जाके फिर मुड़ा तो सुमन उसे ही एकटक देख रही थी आंसुओं से भरे आँखों से । उसका दिल किया कि लौट जाऊ सुमन के पास लेकिन दिल जो चाहे वो हो जाए तो फ़िर सोचना ही क्या ?
राज स्टेशन पर जब पहुँचा तो ट्रेन 1 घंटा लेट थी । " दिल जिस बातो को सामने रहकर नहीं कह पाती उसे दूर रह के कलम कागज़ कह देते है ।"
सुमन मैं ये पहला ख़त तेरे पास लिख रहा हूँ । माफ कहना मैं आज तुमसे बिना मिले ही चला आया। मैं मिलने तो गया था लेकिन तुम्हारे सिसकी ने मेरे मुह पे ताला और कदमों पे जंजीर बाँध दी। जबान धोखा दे गया और हिम्मत टूट गई । मैं तुमसे कुछ कह नहीं पाया। मैं पढाई खत्म होते ही लौट आऊंगा।
तेरा दोस्त राज
दिल्ली आने के बाद एक पल भी राज का मन नहीं लगता था। हर समय सुमन का रोता चेहरा दीखता। लगता था सुमन की ऑंखें पुकार रही हो "आ जाओ लौट कर तेरी याद मुझे हर पल सता रही है चाहे जहाँ भी जाऊ तेरी कमी मुझे रुला रही है " राज हरदम यही अपने आप से कहा करता मैंने तो सुना था की "दिल्ली दिलवालों का हैं , यहाँ की रंगीनियों में हर किसी का मन लग जाता है "। लेकिन मेरा यहाँ मन क्यूँ नहीं लगता। फिर भी पढाई के साथ साथ पर्तियोगी परीक्षाये देते रहे उसने। और ग्रेजुएसन की परीक्षा खत्म होते ही उसके CDS के रिजल्ट भी आ गए थे । उसे 2 महीने के बाद ट्रेनिंग के लिए देहरादून जाना था । उसकी खुशी दुगुनी हो चुकी थी । अब वो घर जा सकता था।
घर आया तो देखा सुमन के घर में काफी चहल पहल हैं। एक बार उसका दिल आशंका से भर गया।
सुमन के पिताजी रास्तें में मिल गए , बधाई हो बड़ी खुशी हुई जानकर की तुम ट्रेनिंग के लिए देहरादून जा रहे हो , वे बोले बेटा एकदम सही समय पे आ गए हो । मेरे बुढे कंधे अब काम से हलके हो जायेंगे । अब शादी की सारी तैयारी तुम्ही देखो ।
राज ने डरते डरते पूछा किसकी शादी हो रही है ।अरे सुमन की शादी हो रही है ।
जिसका डर था आखिरकार वही हुआ .
राज ने दर्द भरे आवाज़ में पूछा, सुमन कहा है , तो वे बोले तेरे ही घर गयी होगी। शादी तय होने के बाद से ना तो उसे खाना की चिंता रहती हैं ना सोने की। पता नहीं क्यों खोयी रहती हैं आजकल ।1 महीना में सूख कर कांटा हो गई है , जरा तुम ही समझाना उसे बेटा। और भी ना जाने वे क्या क्या बोलते रहे और राज के दिल का हाल जाने बगैर उसके दिल को छलनी करते रहे । राज चुपचाप सुनता रहा ।
फिर अपने घर आया और माँ को प्रणाम किया और सीधे अपने कमरा में गया . वहाँ सुमन तो नहीं थी लेकिन उसके सभी सामान वैसे ही थे जैसे वह छोड़ के गया था लेकिन कमरा पहले से ज्यादा साफ सुथरा था। जैसे कमरा की हर एक चीज वहाँ उसके होने की अहसास दिला रही हो ।
फिर आकर माँ से पूछा सुमन कहाँ गयी ।
माँ बोली अभी तो तेरे कमरा में ही थी पता नहीं कहाँ गयी। लाख रोकती रही की राज अभी आने वाला है , मिल के जाना लेकिन बोलने लगी की मुझे जरुरी काम याद आ गया है मैं आकर मिल लूंगी राज से। आखिरकार क्या करती बेचारी , वो तुमसे प्यार करती है ना । तुम्हारे जाने के बाद दिन भर तेरे कमरा में पड़ी रहती थी । तुम्हारे कमरे की साफ - सफाई करती रहती थी . पागलों की तरह तेरे किताबों को चूमती रहती । एक दिन मैंने देख लिया और पूछा तो बोली , चाची मै राज से प्यार करती हूँ . मैं शादी भी उन्ही से करूंगी। आप मेरी मम्मी से मेरा हाथ मांग लीजये ना । तो आप क्या बोली उससे , राज बेचैन होकर पूछा ? राज की माँ बोली भला मै क्या बोलती । मैं बोली की बेटी एक ही गावं में रहकर तुम दोनों की शादी सम्भव है क्या । समाज हमलोगों का जीना दुश्वार कर देगा। फिर कहने लगी की अगर मेरी राज से शादी नही हुई तो मैं जहर खा लूँगी । कितना समझाईं तो आखिरकार मानी ,लेकिन ख़ुद को जिन्दा लाश बना रखा हैं ।
राज जिंदगी में पहली बार अपनी माँ से गुस्से में बोला, मुझे नहीं पता आपने सही किया है या ग़लत लेकिन एक बार तो मुझसे भी पूछनी चाहिए थी ना की मेरे दिल में क्या हैं। बस मुझे इतना पता है भूखे रहने पर आपकी समाजआपको 2 जुन रोटी नही देगी खाने के किए । लेकिन समाज दो मासूम जिंदगियों की बलि जरुर चढा दी । और इसके जिम्मेवार आप भी हैं थोड़ी या बहुत ।
राज सिसकते हुए अपने कमरे में चला गया और सुमन का इंतजार कराने लगा। राज बार बार सोच रहा था पता नही मुझे किस गलती की सजा दे रही है । कम से कम मुझसे पूछ लेनी चाहिए थी कि मेरे दिल में क्या है । पता नही उसके आँखें कब बंद हो गए । सुमन अगर आने के लिए गयी रहती तब ना आती ।
रात होने पर माँ ने जगाई और खाना खाने को बोली। " जब दिल टूट जाता हैं तो मानव का किसी कम में मन नही लगता हैं "। खाना खाने कि बात तो दूर उसे पूरी दुनिया वीरान लग रही थी । माँ राज को समझाने लगी , बेटा जो हुआ उसे भूल जाओ । " प्रेम केवल पाने का मतलब ही नही होता । प्रेम त्याग भी करना जानता है । बस समझ लो तुम्हारा प्रेम सफर तो बना कुछ दिनों के लिए लेकिन मंजिल ना बन सका " । मैंने तेरे दिल का हाल जाने बगैर बहुत बड़ी गलती कर दी तेरे साथ । ये तेरी बदनसीब माँ कुछ नही कर सकी तेरे लिए । और राज ने माँ के सीने पे सर रख दिया ।
आँसूओं के रेला उसके आंखों से बह निकले। " बेबसी के आँसूं कभी कभी इंसान के साथ बड़ा उपकार करती है ,आँख के आँसू ह्रदय के आँसू को बहा ले जाती है " ।
जब राज चुप हुआ तो माँ रोते हुए कहने लगी ,सुमन के पिताजी तुझे बुलाने आए थे । जा शादी की तैयारी में उनके हाथ बटा दे समझाना दोस्त के शादी में मदद कर रहे हो , निस्वार्थ मदद ।
आँसू के बहने से दिल को सुकून तो मिला ही था और माँ की बातें राज पे जादू सा असर किया।
राज उसकी शादी के तैयारी में ख़ुद का दर्द भुला दिया । धीरे धीरे वह दिन भी आया जिसे सभी को बेसब्री से इंतजार था । सभी खुश थे सिवाय राज और सुमन के ।
उस दिन पता नही राज के शरीर में इतनी फुर्ती कहाँ से आ गयी थी । वो मशीन कि तरह भाग भाग कर काम देख रहा था कि पार्टी में कोई त्रुटी न रह जाए। चारों तरफ़ रंगीन बल्बों की सजावट थी । राज को लग रहा था ये बल्ब उसके टूटे दिल पे कहकहे लगा रहे है झिलमिलाते हुए । उन बल्बों की रोशनी से पूरी पार्टी जगमगा रही थी । केवल राज और सुमन के दिल में अन्धकार था । लेकिन इन बातो से तो उसे कोई सरोकार ही नही था आज , आज तो अपने दिल को हाड़ मांस के बजाय पत्थर का बना लिया था । सुमन न कभी राज के सामने आती थी और राज भी उसके सामने जाने से हिचकिचाता था। उन्हें डर था कि कही फ़िर से कमजोर न हो जाए वे दोनों ।
राज सभी मेहमानों को खाना खिलवाने के बाद थोडा आराम करने के लिए कुर्सी पे बैठ गया। बहुत दिन से ठीक से नही सोने और आज की थकान की वजह से उसे न जाने कब नींद आ गयी।
सुबह होने से पहले रोने की आवाज़ सुनकर उसकी नींद खुली। उसने देखा सुमन की विदाई हो रही है। कुछ देर में सुमन के विदाई सम्पन्न होने वाली थी । राज सुमन के पास गया उसका दिया हुआ तस्वीर उसे लौटा दिया और बोला अब ये तेरी और केवल तेरी अमानत है, इसपर अब मेरा कोई अधिकार नही ।
सुमन तुंरत गाडी से उतरी और राज का पैर छूकर रोते हुए बोली, राज मुझे माफ कर देना मै तुम्हे दर्द और तन्हाई के सिवा कुछ देके तो नही जा रही लेकिन हाँ तुम्हारी यादें और तुम्हारे साथ बिताये हुए एक एक पल अपने दिल में संजोयें जा रही हूँ और ये तस्वीर तो है भी नहीं की मै तुम्हारी तरह लौटा दूँ , ऐसे भी मै लौटाना नहीं चाहती उसपे मेरा और केवल मेरा अधिकार हैं और तुम उसे मुझसे छीन भी नही सकते । हो सके तो मुझे इस गलती के लिए माफ कर देना ।
राज सुमन के ओठों पे अंगुली रख के बोला ऐसे नही बोलते । तुम अपनी यादें मेरे पास छोड़ के जा रही हो और मेरे सात जन्मो के लिए काफी है । तुम सदैव सुखी रहो बस यही मेरी दुआ है । फिर सुमन को राज गाड़ी में बैठाया और गाड़ी चल पडी ।
पूरी तरह अभी सुबह के उजाले फैले नही थे । राज छत पे चढ़ गया और तब तक सुमन को जाते देखता रहा जब तक गाड़ी के बल्ब की रोशनी दिखनी बंद नही हो गई । अब तक उसके रोके हुए आंसूओं के सैलाब उमड़ पड़ा जो शायद इसी समय का इंतजार कर रहा हो बाहर आने के लिए । राज को लगा की ये चांदनी रात अपनी समाप्ति पे नही मगर मेरे वीरान हुए दिल पे रो रही है . तभी कोयल की कुक अपने होने का अहसास दिलाई जैसे कह रही हो , मै भी तुम्हारे दुःख में शरीक हुँ ," टूटे दिलवाले "।
1 comment:
Realy Its Very Touching Story...
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