Tuesday, February 15, 2011

मेरे आँखों में आज भी बरसात हैं


तू नहीं तो क्या
तेरी यादे तो मेरे साथ हैं
मौनसून बीत गए तो क्या हुआ
मेरे आँखों में आज भी बरसात हैं



सुबह की शबनम से तो पूछो
उनके दिल की बात
दिखते है हमें चमकीले मोती
वो तो उनके बर्बादी की दास्ता है

हर पल , हर लम्हा
तेरे सजदे में सर झुकता हैं
क्या करोगे जब वो तेरे खुदा ही
मेरे से नाराज हैं

बंद हो जाएगी तेरी ऑंखें भी
मेरी तरह , किसी की चाहत में
ये दुआ तो नहीं
टूटे दिल की बिलखती जज्बात हैं

Saturday, October 23, 2010

शर्मिंदगी हैं आज मुझे


शर्मिंदगी हैं आज मुझे ,
की
अब भी मै तेरे प्यार में हूँ ,
शर्मिंदगी
हैं मुझे ,
अदमुन्धी
बोझिल पलकों को तेरा इंतजार आज भी हैं .

ठिठुरती सर्द रात में ,
मुझे चिपकना तेरा ,
शर्मिंदगी हैं मुझे ,
उन
रातों की खुमार मुझपे आज भी हैं .

जेठ की दुपहरी में ,
मेरे
चेहरे पे अपनी साँसे छोड़ना ,
शर्मिंदगी हैं मुझे ,
वो
सिहरन मुझे याद आज भी हैं .

मॉनसून की फुहार में भीगना, लड़ना तेरा ,
पोखर में पैर डालके एक दुसरे पे पानी छिटना ,
शर्मिंदगी हैं मुझे ,
वो चेहरा आँखों के सामने आज भी हैं .

तोड़ता हूँ हर उन तस्वीरों को रोज रोज,
जो
लम्हे साथ में हमने बिताये थे ,
शर्मिंदगी हैं मुझे ,
टूट
गया खुद ही इसकी अहसास आज भी हैं .

Friday, October 22, 2010

फिर भी नजरे तेरे लिये क्यूँ बिछी सी हैं


डुबो दी खुद को मय में ,
तेरी यादों से निज़ात पाने को ,
फिर भी तेरी यादें क्यूँ धुँधली सी हैं .

सजती हैं महफिले ,
लगाता हूँ ठहाके,
फिर भी इन आँखों में क्यूँ नमी सी हैं .

डूब रहे है तारें आकाश में,
कर रहे पंछी चहचहाके दिन का स्वागत,
फिर भी दिल में क्यूँ इक गोधुलि सी हैं .

जानता हूँ की आओगो,
कब्र पे मेरे मिटटी डालने भी ,
फिर भी नजरे तेरे लिए क्यूँ बिछी सी हैं .